दुनिया जो रूठी है हमसे
अगर तुम भी थोड़ा रूठ गए तो क्या गम है।
तिर तिर के घुट रहे है हम,
अगर कुछ बातें तुम्हारी भी हमे घोट जाएं , तो क्या गम है।
जो लोग पहले साथ रहकर बेवजह ही तारीफों के बोल बोलते थे,
अगर वो आज बेवजह ही धोका दें जायें , तो क्या गम है।
न गुजरते थे जिनके दिन रात हमसे बिना मिले,
आज वो दोस्त अगर मतलबी हो जायें, तो क्या गम है।
खर रही है आज ये वक़्त और यह घड़ी तो क्या हुआ,
फिर कभी जरूर कहीं मिल जाएँगे सब हमे पहले की तरह यूँ ही बेवजह।
दोस्तों, यार्रों और परिवार को सलाह है मेरी न मरोडो इस वक़्त को इतना
जो कभी फिर न जुड़ पाए वैसे टूट भी जाए तो तुम्हे क्या गम है।
अगर तुम भी थोड़ा रूठ गए तो क्या गम है।
तिर तिर के घुट रहे है हम,
अगर कुछ बातें तुम्हारी भी हमे घोट जाएं , तो क्या गम है।
जो लोग पहले साथ रहकर बेवजह ही तारीफों के बोल बोलते थे,
अगर वो आज बेवजह ही धोका दें जायें , तो क्या गम है।
न गुजरते थे जिनके दिन रात हमसे बिना मिले,
आज वो दोस्त अगर मतलबी हो जायें, तो क्या गम है।
खर रही है आज ये वक़्त और यह घड़ी तो क्या हुआ,
फिर कभी जरूर कहीं मिल जाएँगे सब हमे पहले की तरह यूँ ही बेवजह।
दोस्तों, यार्रों और परिवार को सलाह है मेरी न मरोडो इस वक़्त को इतना
जो कभी फिर न जुड़ पाए वैसे टूट भी जाए तो तुम्हे क्या गम है।
Very nice quoted .... 👍
ReplyDeleteThanks
ReplyDeleteतू क्यों ग़मज़दा है
ReplyDeleteये वक़्त वक़्त की बात है
Sahi kaha ram
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