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Monday, March 26, 2018

आज दर्द लिखना चाहती हूँ...



आज दर्द लिखना चाहती हूँ
खूब लिखना चाहती हूँ
जो रूठे हैं उन्हें नहीं मनाना
पर जो माने है उन्हें सताना नहीं चाहती हूँ

आज दर्द लिखना चाहती हूँ
खूब लिखना चाहती हूँ
बीत गए जो पल उनका उजाला न बटोर सकी
जो आज है मेरा उसे जीना चाहती हूँ

आज दर्द लिखना चाहती हूँ
खूब लिखना चाहती हूँ
मेरे अपनों ने मुझे ठुकराया तब इस ज़माने ने मुझे अपनाया
आज हर किसी को शुक्रिया कहना चाहती हूँ

आज अपना दर्द लिखना चाहती हूँ
खूब लिखना चाहती हूँ
शिकायत नहीं की तुम न समझ सके
तुम बीच सफर में हाथ छोड़ चले , क्यों? बस इतना पूछना चाहती हूँ

आज दर्द लिखना चाहती हूँ
खूब लिखना चाहती हूँ
मेरे घर पर है कोई इंतज़ार कर रहा
उसकी बाहों  में उसका बेटा वापस देना चाहती हूँ
आज दर्द लिखना चाहती हूँ
खूब लिखना चाहती हूँ








Wednesday, October 11, 2017

इस दिवाली क्या खुस- फुस है बाज़ारों में.... आइये जानते है ..

खुस- फुस है बाज़ारों में हम आगे....  हम आगे... ।
लेकिन कहीं दूर सड़क के नुक्कड़ पर, सुबह से बैठी है वो। .
इस बार फिर उसके बूढ़े हाथों ने , दियों की पोटली सजाई है।
बाज़ारों से जब गुज़रोगे तुम , न वो रोकेगी न वो टोकेगी। .
बस उसकी आंखे तुझसे पूछेगी
चीनी लाइट खरीद क्यों जलाते हो हर साल पैसा अपना , जब मैंने तेरे लिए रौशनी वाले दिए बनाये है
तो इस बार बेवजह कुछ दीये खुद खरीद लेना कुछ दूसरों से ख़रीदवाना...  
वो बैठें है इस आस में की कुछ दिए उनके भी बिकेंगे ...
तो इस दिवाली हम भी कुछ ख़ास करेंगे... 
तो इस साल चीनी लइटों का मोह छोड़ो और मिट्टी के दीयों से घर सजोलों
क्योकि ये दिवाली दीपाक वाली 😊

Friday, May 12, 2017

कोई तो हो जो मेरी..

गिले ही गिले हैं चारों तरफ कोई तो हो जो मेरी..
कभी सुबह जो तुमसे बात न हो तो कोई तो जो मेरी...
ये भी सही की सारा दिन अपनी गलती ढूंढने में निकल दूँ में मगर कोई तो हो जो मेरी...
रात जो होती जब बात मेरी होती फिर कोई नई गलती वो ढूंढ जो लेते,उस वक़्त कोई तो हो जो मेरी...
जिंदगी के दस्तूर कई मगर जब बात हो तेरी तब कोई तो हो जो मेरी...  
कह दूँ अगर ना है डर तो तब भी है जब हाँ है, तब कोई तो हो जो मेरी...
वो चला गया ये कह कर की भरोसा नहीं उसे कैसे बताऊं की ये समझ का धोका है
जब सब खत्म हो गया तब पुछा उसने क्या है चाह तेरी
मैंने भी रोक के उससे कहा जो तू होता तो क्या होता अब जो तो नहीं तो कोई तो हो जो मेरी... 

Tuesday, May 9, 2017

जिंदगी तुझे क्या गम है ?

दुनिया जो रूठी है हमसे
अगर तुम भी थोड़ा रूठ गए तो क्या गम है।
तिर तिर के घुट रहे है हम,
अगर कुछ बातें तुम्हारी भी हमे घोट जाएं  , तो  क्या गम है।
जो लोग पहले साथ रहकर  बेवजह ही तारीफों के बोल बोलते थे,
अगर वो आज बेवजह ही धोका दें जायें , तो क्या गम है।
न गुजरते थे जिनके दिन रात हमसे बिना मिले,
आज वो दोस्त अगर मतलबी हो जायें, तो क्या गम है।
खर रही है आज ये वक़्त और यह घड़ी  तो क्या हुआ,
फिर कभी जरूर कहीं मिल जाएँगे सब हमे पहले की तरह यूँ ही बेवजह।
दोस्तों, यार्रों और परिवार को सलाह है मेरी न मरोडो इस वक़्त को इतना
जो कभी फिर न जुड़ पाए वैसे टूट भी जाए तो तुम्हे क्या गम है।